राजस्थान में 1857 की क्रांति | Rajasthan me 1857 ki Kranti

राजस्थान में 1857 की क्रांति

Rajasthan me 1857 ki Kranti
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★ ब्रिटिश प्रधान मंत्री : पार्म्सटन
★ ब्रिटिश सेनापति (कमांडर-इन-चीफ) : 73-74 साल का एन्सन कमांडर इन चीफ था और वो उस समय शिमला में पड़ा था. विद्रोह के 13 दिन बाद तो वो अंबाला पहुँचा.
★ क्रांति के समय भारत का गवर्नर जनरल : लार्ड केनिंग (1856-62 ई.)
★ क्रांति के समय राजस्थान का A.G.G. : जॉर्ज पेट्रिक लोरेन्स
★ A.G.G.कार्यालय : माउन्ट आबू
★ क्रांति के समय राजस्थान का कमिश्नर : कोल्विन
★ कमिश्नर कार्यालय :अजमेर
★ 06 सैनिक छावनियां :-
A. नसीराबाद छावनी :
i.नियुक्त टुकड़ियां : 15 वीं एवं 30 वीं N.I. टुकड़ी (अजमेर ), बंगाल केवलरी टुकड़ी
ii. सबसे बड़ी व सबसे शक्तिशाली छावनी
B. नीमच छावनी : 7 वीं इन्फेंट्री कंटिनजेंट (M.P.), बंगाल नेटिव हॉर्स आर्टिलरी टुकड़ी
C. ब्यावर छावनी :
i. नियुक्त टुकड़ी : मेरवाडा बटालियन (बाद में अजमेर स्थान्तरित)
ii. ब्यावर की छावनी के सैनिकों ने क्रांति में भाग नहीं लिया।
D. देवली छावनी : कोटा कंटिनजेंट(टोंक )
E. खेरवाडा छावनी :
i. नियुक्त टुकड़ी : मेवाड़ भील कोर (उदयपुर)
ii. खैरवाडा की छावनी के सैनिकों ने क्रांति में भाग नहीं लिया
F. एरिनपुरा छावनी : जोधपुर लीजियन टुकड़ी (पाली)
★ 10 मई 1857 ई. को जब मेरठ छावनी से अखिल भारतीय स्तर पर विद्रोह के आरम्भ होने की सूचना अंग्रेजों को प्राप्त हुई तो अंग्रेजों की प्रशासनिक राजधानी अजमेर में नियुक्त बंगाल की 15 वीं N.I. टुकड़ी को यहाँ से हटाकर नसीराबाद छावनी में स्थान्तरित कर दिया गया एवं ब्यावर छावनी स्थित मेरवाडा बटालियन को अजमेर की सुरक्षा हेतु नियुक्त किया गया. क्योंकि 1857 की क्रांति के समय राजस्थान की छः सैनिक छावनियों में सभी सैनिक भारतीय थे कोई यूरोपीयन सैनिक नहीं था अतः डीसा (गुजरात) से यूरोपीयन रेजीमेंट को बुलाया गया. Rajasthan me 1857 ki Kranti
Note : ब्रिटिश सैनिक छावनियों में विद्रोह का क्रम :- 1.नसीराबाद 2.नीमच 3.देवली 4.एरिनपुरा
Note : ब्रिटिश सैनिक छावनियाँ जिन्होंने विद्रोह में भागीदारी नहीं की :- 1.ब्यावर एवं 2.खैरवाड़ा
★ क्रांति का निर्धारित दिवस : 31 मई 1857 ई.
★ क्रांति का प्रतीक : कमल और चपाती
★ .क्रान्ति का तात्कालिक कारण : नई एनफील्ड राईफल में प्रयुक्त गाय एवं सूअर की चर्बी वाले कारतूसों का प्रयोग करने से भारतीय सिपाहियों का इंकार कर देना
★ राष्ट्रीय स्तर पर क्रांति की प्रथम घटना : 29 मार्च 1857 ई., बैरकपुर छावनी (बंगाल) में 34 वीं NI टुकड़ी के विद्रोही नेता मंगल पाण्डे द्वारा
Note : मंगल पाण्डे को 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दी गई थी. (बिपिन चन्द्र के अनुसार मंगल पांडे को फांसी 29 मार्च को ही दे दी गई थी. – आधुनिक भारत,कक्षा 12 के लिए, NCERT, नई दिल्ली, 1997, अध्याय : 6, 1857 का विद्रोह, पृष्ठ 98)
★ .राष्ट्रीय स्तर पर क्रान्ति का आगाज : 10 मई (रविवार) 1857 ई. को मेरठ छावनी में सांय 5 बजे 20 वीं NI टुकड़ी के कोतवाल ‘धन सिंह गुर्जर’ (अमर शहीद) द्वारा
Note : राजस्थान का अमर शहीद – सागरमल गोपा (4 अप्रैल 1946 को हत्या)
● राजस्थान का प्रमुख शहीद – नानक जी भील (2 अप्रैल 1923 ई. को हत्या)
★ .‘क्रान्ति दिवस’ : 10 मई
★ राजस्थान में क्रांति का आरम्भ : नसीराबाद छावनी से 15 वीं N.I. टुकड़ी के सिपाही बख्तावर सिंह के नेतृत्व में 28 मई 1857 ई. को
★. प्रसिद्ध नारा : “चलो दिल्ली मारो फिरंगी” – एरिनपुरा छावनी की विद्रोही जोधपुर लीजियन टुकड़ी के सैनिकों द्वारा
★ .क्रांति का पहला शहीद : अमरचंद बाठिया (मूल निवासी – बीकानेर)
★ .अमरचंद बाठिया को फांसी दी गई : ग्वालियर में 22 जुलाई 1858 ई. को (अपनी सम्पूर्ण सम्पत्ति अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्षरत लक्ष्मी बाई को दान देने के आरोप में)
★ . क्रान्ति का भामाशाह : अमरचंद बाठिया
Note : राजस्थान में स्वतन्त्रता (जन) आन्दोलन के भामाशाह : सेठ दामोदार दास राठी (ब्यावर).
★ .क्रांति की देवी : सुगाली माता (आउआ ठिकाने की कुल देवी
★. राजपूताने का एक मात्र नरेश जो विद्रोहियों एवं अंग्रेजों के प्रति तटस्थ रहा : बूँदी महाराव रामसिंह प्रथम हाड़ा
★. अंग्रेजों का साथ देने वाला राजपूताने का प्रथम नरेश: मेवाड़ महाराणा स्वरूप सिंह
★ अंग्रेजों का साथ देने से इनकार करने वाला राजपूताने का नरेश : शाहपुरा राजाधिराज लक्ष्मणसिंह
★. बिना अंग्रेजों की अनुमति के राज्य की सीमा से बाहर जाकर विद्रोहियों को कुचलने वाला एक मात्र राजपूत नरेश : बीकानेर महाराजा सरदार सिंह राठौड़
★. राजस्थान की दलित लड़की जो झांसी की रानी लक्ष्मी बाई का साथ देते हुए अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हुई : झलकारी बाई
Note : 1818 की संधियों के तहत ब्रिटिश संरक्ष्ण के दुष्परिणामों के विरुद्ध शंखनाद करने वाला कवि : बांकीदास ने अपनी कविता ‘आयो अंगरेज मूळक रे ऊपर’ के माध्यम से कम्पनी का संरक्षण इन संधियों के माध्यम से स्वीकार करने वाले राजपूत नरेशों को चेताया था.
★. गोरा – काला युद्ध : चेलावास युद्ध
★. किसान जिसने अंग्रेजों को शरण दी : रुगाराम (डूंगला गाँव- चित्तौड़)
★. सुनियोजित षड्यंत्र / लोकप्रिय जनविद्रोह : कोटा
★ .मुस्लिम विद्रोह : कोटा ( डॉ. मथुरालाल शर्मा के अनुसार)
★. प्रसिद्ध PA जिनकी हत्या पर विद्रोहियों द्वारा जश्न मनाया गया : मेजर बर्टन (कोटा) एवं मेजर मोकमेसन (जोधपुर)
★ .A.G.G. रिपोर्ट में कम्पनी की सर्वाधिक कृपा -पात्र रियासत : करौली
★. राजस्थान का मंगल पांडे : अमर चंद बाठिया
★ .“राष्ट्रीय सेनानी” – ठा. कुशालसिंह चम्पावत (नाथूराम खडगावत के अनुसार)
★. ‘स्वतन्त्रता संग्राम का नायक’ – ठा. कुशालसिंह चम्पावत
★ .राजस्थान में सर्वाधिक दीर्घ अवधि अंग्रेजों से तक संघर्षरत राष्ट्रीय योद्धा – ताँत्या टोपे
★ .लाडनूं (नागौर ) में अंग्रेजों से पुरुषवेश में लड़कर उनके दांत खट्टे करने वाली वीरांगना : सुजा राजपुरोहित
★ .क्रांति के समाप्त होने पर ब्रिटिश सरकार ने संकट काल में किस गाँव में कुँआ खुदवाया तथा कौन कौन से ग्रामीणों को पुरस्कार स्वरूप 1200 रूपये दिए : बड़ी सादड़ी के केसुन्दा गाँव के पंडित यदुराम, पटेल केसरी सिंह तथा ओंकार सिंह ने नीमच छावनी से भागे डॉ. मरे एवं डॉ. गेन को शरण दी. क्रान्ति के समाप्ति के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने पंडित यदुराम, पटेल केसरी सिंह तथा ओंकार सिंह में से प्रत्येक को 1,200 रूपये दिए एवं केसुन्दा गाँव वालों के लिए एक कुँआ खुदवाया.
★ .किसने डूंगला गाँव के किसान रुगाराम के यहाँ से 40 अंग्रेजों, बच्चों एवं स्त्रियों को सुरक्षित उदयपुर पहुँचाया.: बेदला के राव बख्तसिंह
★ .एकमात्र रियासत जहाँ विद्रोह की कमान राज्य के बाहर के क्रांतिकारियों (इन्दौर व ग्वालियर) के हाथों में थी – धौलपुर
★ .राजपूताने की एक मात्र रियासत थी जिसे राज्य से बाहर की फ़ौज (पटियाला की सेना) ने विद्रोहियों के अधिकार से मुक्त (दिसम्बर 1857 ई.) – धौलपुर
★ .ताँत्या टोपे का राजस्थान में पहला प्रवेश : जून 1858 ई. के बाद मांडलगढ़ से बाँदा नवाब के साथ भीलवाड़ा में प्रवेश
★ .ताँत्या टोपे का राजस्थान में कुल प्रवेश : कुल 3 बार
A. प्रथम बार: जून 1858 ई. – अगस्त 1858 ई. तक मेवाड़ में प्रथम प्रवास
B. द्वितीय बार: 3 दिसम्बर 1858 ई. -23 दिसम्बर 1858 ई. तक मेवाड़ में द्वितीय प्रवास
C. फरवरी 1859 : तृतीय बार मेवाड़ में प्रवेश
★ .ताँत्या टोपे ने 5 लाख रू. वसूले : झालावाड़ के शासक पृथ्वीसिंह से
★ .एक मात्र रियासत जिसमें ताँत्या टोपे नहीं गया : जैसलमेर
★ .राजपूताने का नरेश जिसने दिल्ली पर ब्रिटिश नियंत्रण स्थापित होने की खुशी में 21 तोपें छोडी – जोधपुर महाराजा तख्तसिंह राठौड़
★ .ताँत्या टोपे को गिरफ्तार करवाने वाला गद्दार : मानसिंह नरुका
★ .ताँत्या टोपे को गिरफ्तार करने वाला ब्रिटिश अधिकारी : मेजर रिचर्ड एवं जॉन मीडोज़
★ .तांत्या टोपे को फाँसी : 18 अप्रैल 1859 ई., सिप्री (शिवपुरी-M.P.) में
★ .ताँत्या टोपे की फाँसी का विरोध : मेवाड़ PA कैप्टन सी.एल. शॉवर्स ने अपनी पुस्तक A Missing Chapter of The Indian Mutiny में
★ .नरेश जिसका कम्पनी सरकार ने अपमान किया: : कोटा महाराव रामसिंह द्वितीय हाडा की मेजर बर्टन हत्याकांड में संदिग्द्ध भूमिका मानते हुए उसकी तोपों की सलामी को 15 तोपों से घटाकर 11 तोपें कर दी
★ .विद्रोह जिसकी चर्चा इलाहबाद से प्रकाशित होने वाले अख़बार Daily Express में Revolt in an Indian State : टोंक
★ .गदर के नेता अंतिम मुग़ल सम्राट बहादुर शाह जफर की सहायता हेतु 600 मुज़ाहिद दिल्ली भेजने वाला क्रांतिकारी : मीर आलम खान (टोंक नवाब वजीरुद्दौला)
★ .दुर्गा दल : झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई की महिला ब्रिगेड जिसका नेतृत्व झलकारी बाई के हाथ में था
★ .’यदि एक प्रतिशत महिलाएं भी …..बन जाए तो अंग्रेजों को जल्द भारत छोड़ना पड़ेगा’ ऐसा किस ब्रिटिश अधिकारी ने एवं किसके लिए बोला था : जनरल ह्यूरोज़ ने झलकारी बाई के लिए कहा था
★ .शेखावाटी का वणिक् परिवार जिसने स्वतन्त्रता के अमर सेनानी ताँत्या टोपे के शेखावाटी में आगमन पर उसकी सम्पूर्ण फ़ौज की अपने निजी खर्चे पर आवभगत की थी : तांत्या टोंपे के लक्षमणगढ़ (सीकर) आगमन पर वहाँ के नगर सेठ गनेड़ीवाल खानदान द्वारा
★ .प्रसिद्ध राजस्थानी साहित्यकार जिसने विख्यात अमर स्वतन्त्रता सेनानी ताँत्या टोपे को शेखावाटी के ठिकाने लक्षमणगढ़ में शरण दिलवाई थी – शंकर दान सामोर
★ .ताँत्या के छः सौ सैनिकों ने किस राजपूत नरेश के सम्मुख आत्मसमर्पण किया था : महाराज सरदार सिंह के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। सरदार सिंह ने ब्रिटिश सरकार से अनुरोध कर इन सैनिकों को क्षमा दिलवा दी.
★ .अजमेर की रक्षा करने वाला ब्रिटिश अधिकारी : लेफ्टिनेंट काइनेल की देखरेख में मेर रेजीमेंट + हरमेजस्टीज इन्फेन्ट्री + 12 वी बम्बई इन्फेंट्री
★ .अजमेर की रक्षार्थ जोधपुर महाराज तख्तसिंह ने अपने किस सेनानायक की कमान में जोधपुर की अश्वारोही सेना अजमेर की रक्षार्थ भेजी : कुशलराज सिंघवी
★ .शेखावाटी के कालजयी कवि शंकर दान सामोर ने 1857 ई. के गदर को एक स्वर्णिम अवसर मानते हुए लिखा कि ‘फाल हरिण, चूक्यां फटक, पाछो फाल न आवसी, आजाद हिन्द करवा अवर, औसर इस्यो न आवसी’ Rajasthan me 1857 ki Kranti

■ क्रांति का आरम्भ :-

  1. 28 मई 1857 ई. : राजस्थान में (नसीराबाद छावनी)
  2. 3 जून 1857 ई. : नीमच छावनी में
  3. 4-5 जून 1857 ई. : देवली छावनी में
  4. 08 सितम्बर 1857 ई. : बिथौडा युद्ध द्वारा आउवा ठिकाना में
    15 अक्टूबर 1857 ई. : कोटा में
    ■ मृतक प्रमुख अधिकारी :-
  5. कर्नल वेनी, न्यूबरी एवं स्पोर्टिसवुड : 28 मई 1857 ई., नसीराबाद छावनी
  6. जोधपुर फौजदार अनाड़सिंह : 8 सितम्बर 1857 ई., बिथौडा युद्ध में
  7. जोधपुर PA मोकमेसन : 18 सितम्बर 1857 ई. को चेलावास युद्ध में
  8. मेजर बर्टन (कोटा PA), फ्रेंक, ऑर्थर, डॉ. सिविल कोंटम एवं सेड़लर : 15 अक्टूबर 1857 ई., कोटा में
  9. कर्नल गराड़ : 16 नवम्बर 1857 ई. को नारनौल युद्ध में

■ प्रमुख घटनाक्रम :-

● . 29 मार्च 1857 ई. : बैरकपुर छावनी (बंगाल) में 34 वीं NI टुकड़ी के विद्रोही नेता मंगल पाण्डे द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर क्रांति की प्रथम घटना
●. 10 मई (रविवार) 1857 ई. : मेरठ छावनी में सांय 5 बजे 20 वीं NI टुकड़ी के कोतवाल ‘धन सिंह गुर्जर’ (अमर शहीद) द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर क्रान्ति का आगाज
●. ‘क्रान्ति दिवस’ : 10 मई
●. 19 मई 1857 ई. : अजमेर में AGG जॉर्ज पेट्रिक लोरेन्स को मेरठ विद्रोह की सूचना प्राप्त
● 28 मई 1857 ई. : राजस्थान में क्रांति का आरम्भ : नसीराबाद छावनी से 15 वीं N.I. टुकड़ी के सिपाही बख्तावर सिंह के नेतृत्व में को
विद्रोह के दौरान लेफ्टिनेंट काइनेल की देखरेख में मेर रेजीमेंट ने अजमेर नगर की रक्षा की एवं महाराज तख्तसिंह ने मॉक मेसन के आदेशानुसार सेनानायक कुशलराज सिंघवी की कमान में जोधपुर की अश्वारोही सेना अजमेर की रक्षा में भेजे
●. 31 मई 1857 ई. : राष्ट्रीय स्तर पर क्रान्ति का निर्धारित दिवस
●. 3 जून 1857 ई. : हीरासिंह के नेतृत्व में नीमच छावनी में रात्रि 11 बजे 7वीं नेटिव इन्फेण्ट्री के जवानों ने तोप से दो गोले दागकर विद्रोह
●. 8. जून 1857 : नीमच छावनी पर कैप्टन शावर्स का अधिकार
●. 8 सितम्बर 1857 ई. :- बिथौडा युद्ध के माध्यम से आऊवा ठिकाने में विद्रोह आरम्भ जिसमें विद्रोहियों की जीत
●. 18 सित. 1857 ई. : आऊवा ठिकाने में चेलावास युद्ध (गोरा-काला युद्ध) में विद्रोहियों के हाथों जोधपुर P.A. मोकमेसन की हत्या कर गर्दन आउआ दुर्ग के फाटक पर लटका दिया गया. इस युद्ध में अंग्रेजों की करारी हार. AGG जॉर्ज पेट्रिक लोरेन्स ने बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाकर चूलावास गांव में शरण
●. दिसम्बर 1857 ई.: पटियाला की सेना ने विद्रोहियों के अधिकार से धौलपुर को मुक्त किया
●. 24 जनवरी 1858 ई. : कर्नल होम्स का आऊवा ठिकाने पर अधिकार. ठाकुर कुशालसिंह आऊवा दुर्ग के संघर्ष का उत्तरदायित्व अपने छोटे भाई पृथ्वीसिंह को सौंपकर सर्वप्रथम सलुम्बर (मेवाड़) ठाकुर रावत केसरी सिंह के पास तत्पश्चात कोठारिया (मेवाड़) ठाकुर रावत जोधसिंह के यहाँ शरण ली जहाँ वह 1860 तक रहा.
● . 15 अक्टूबर 1857 ई : कोटा में धनतेरस के दिन P.A. मेजर बर्टन उसके 2 पुत्रों फ्रैंक एवं ऑर्थर एवं डॉ. सैडलर तथा डॉ. सेविल्कोंटम की विद्रोहियों के हाथों हत्या से क्रांति का आरम्भ एवं विद्रोहियों ने महाराव रामसिंह द्वितीय हाड़ा को बंधक बनाया
●. 16 नव. 1857 ई. : नारनौल युद्ध में कम्पनी के हाथों विद्रोही जोधपुर लीजियन टुकड़ी की करारी हार परन्तु ब्रिगे. गराड़ मारा गया
●. जन. 1858 ई. : करौली नरेश मदनपाल सिंह ने मलूमपाल के नेतृत्व में सेना भेजकर कोटा नरेश को मुक्त कराया
●. 30 मार्च 1858 ई. : एच. जी. रॉबर्ट्स द्वारा कोटा पर अधिकार एवं कोटा में विद्रोह का अंत
●. जून 1858 ई. : ताँत्या टोपे का राजस्थान में सर्वप्रथम मांडलगढ़ से बाँदा नवाब के साथ.
● . जून 1858 ई. – अगस्त 1858 ई. : मेवाड़ में ताँत्या टोपे का प्रथम प्रवास
● . 22 जुलाई 1858 ई. : बीकानेर निवासी अमरचंद बाठिया को ग्वालियर में लक्ष्मी बाई को सम्पूर्ण सम्पत्ति दान देने के आरोप में फांसी दी गई
● . 9 अगस्त 1858 ई. : कुआड़ा युद्ध / कोठारी युद्ध (भीलवाड़ा) में ताँत्या टोपे जनरल रॉबर्ट्स से परास्त
●. 14 अगस्त 1858 ई. : कोठारिया युद्ध (नाथद्वारा) में ताँत्या टोपे ने जनरल रॉबर्ट्स एवं कर्नल होम्स को परास्त किया
●. दिसम्बर 1858 ई. -23 दिसम्बर 1858 ई. : मेवाड़ में ताँत्या टोपे का द्वितीय प्रवास
●. 31 जनवरी 1859 : ताँत्या टोपे का दौसा में अंग्रेजों से अंतिम युद्ध
●. फरवरी 1859 : तृतीय बार मेवाड़ में प्रवेश
●. 7 अप्रैल 1859 ई. : मेजर रिचर्ड एवं जॉन मीडोज़ ने मित्र मानसिंह नरूका के धोखे से सोते हुए ताँत्या टोपे को Parone के जंगल (नरवर के जंगल) से गिरफ्तार
●. 18 अप्रैल 1859 ई. : ताँत्या टोपे को सिप्री (शिवपुरी-M.P.) में फाँसी जिसका मेवाड़ PA कैप्टन सी.एल. शॉवर्स ने अपनी पुस्तक A Missing Chapter of The Indian Mutiny में विरोध किया
●. 12 दिसम्बर, 1859 ई. : देवली में कोटा के विद्रोही नेता मेहराब खान पर कार्यकारी PA मेजर जे. से. ब्रुक की अदालत में मुकदमा आरम्भ
●. 31 दिसम्बर 1859 : मेजर जे. सी. ब्रुक ने मेहराब खान को फाँसी की सजा सुनाई
●. 14 मई 1860 ई. : देवली में कोटा के विद्रोही नेता जयदयाल पर हाड़ौती के PA डब्ल्यू. एच. बेनन की अदालत में मुकद्मा आरम्भRajasthan me 1857 ki KrantiRajasthan me 1857 ki Kranti
●. जुलाई 1860 : एजेंसी भवन के आगे कोटा में मेहराब खान को फाँसी
●. 28 जुलाई 1860 ई. : डब्ल्यू. एच. बेनन ने जयदयाल को मौत की सजा सुनाई
●. 17 सितम्बर 1860 : एजेंसी भवन के आगे जयदयाल को कोटा में फाँसी पर लटका
●. 16 नव.1860 ई. : ठा. कुशाल सिंह को निर्दोष पाकर रिहा कर दिया गया
●. 1864 ई. : ठाकुर कुशल सिंह चम्पावत की मृत्यु


■ ब्रिटिश सेनापति :-

  1. लेफ्टिनेंट काइनेल : अजमेर नगर की रक्षा की
  2. कैप्टन शॉवर्स : 6 जून 1857 ई. को नीमच छावनी पर अधिकार
  3. कर्नल होम्स : 24 जनवरी 1858 ई. को प्रसिद्ध केंद्र आऊवा ठिकाने पर अधकार
  4. एच.जी.रोबर्ट्स : 30 मार्च 1858 ई. को कोटा पर अधिकार
    6.कैप्टन ईडन : टोंक पर अधिकार
    6.ब्रिगेडिर पार्क : झालवाड़ पर अधिकार
    7.जनरल मीडोज़ एवं प्रीचोर्ड : ताँत्या टोपे को नरवर जंगल से 7 अप्रैल 1859 ई. को गिरफ्तार
    ■ प्रमुख फाँसी :-
  5. अमरचंद बाठिया को फांसी दी गई : ग्वालियर में 22 जुलाई 1858 ई.
  6. तांत्या टोपे को फाँसी : 18 अप्रैल 1859 ई., सिप्री (शिवपुरी-M.P.) में
  7. मेहराब खान : जुलाई 1860 में एजेंसी भवन के आगे कोटा में फाँसी पर लटका
  8. जयदयाल : 17 सितम्बर 1860 में एजेंसी भवन के आगे कोटा में फाँसी पर लटका
    ■ प्रमुख मुकदमें :-
  9. मेजर टेलर कमीशन : मोकमेसन हत्या में ठा. कुशालसिंह की भूमिका की जांच हेतु
  10. रॉबर्ट आयोग का गठन : PA मेजर बर्टन की हत्या में कोटा महाराव रामसिंह की भूमिका की जांच हेतु
    3.कोटा विद्रोही मेहराब खान पर मुकद्मा :
    I. कार्यकारी PA मेजर जे. से. ब्रुक की अदालत में
    II. 12 दिसम्बर, 1859 ई. को आरम्भ
    III. मेजर जे. सी. ब्रुक ने 31 दिसम्बर 1859 को फाँसी की सजा सुनाई
    IV. जुलाई 1860 में एजेंसी भवन के आगे कोटा में फाँसी पर लटका
    4.कोटा विद्रोही जयदयाल पर मुकद्मा :
    I. 14 मई 1860 ई. को हाड़ौती के PA डब्ल्यू. एच. बेनन की अदालत में कार्यवाही आरम्भ
    ii. डब्ल्यू. एच. बेनन ने 28 जुलाई 1860 ई. को मौत की सजा सुनाई
    iii. 17 सितम्बर 1860 में एजेंसी भवन के आगे कोटा में फाँसी पर लटका Rajasthan me 1857 ki Kranti
    ■ प्रमुख आयोग :-
    1.मेजर टेलर कमीशन :-
    A.मोकमेसन हत्या में ठा. कुशालसिंह की भूमिका की जांच हेतु गठित
    B.ठा. कुशाल सिंह को निर्दोष पाकर रिहा कर दिया गया एवं जोधपुर महाराजा तख्तसिंह को आउआ जागीर ठाकुर को लौटने के आदेश दिए गए जिसे तख्तसिंह ने नहीं माना.
  11. रॉबर्ट आयोग का गठन :-
    A. मेजर बर्टन की हत्या में महाराव रामसिंह की भूमिका की जांच हेतु
    B.कारण: अंग्रेज अधिकारियोंका यह अनुमान था कि बर्टन के वध में महाराव का हाथ था और इसीलिए षड्यंत्र के परिपक्व होने पर उसे कोटा बुलाया गया था. इसकी पुष्टि महाराव एवं विद्रोहियों के मध्य होने वाली संधि से भी होती थी.यद्यपि आयोग ने महाराव को निर्दोष बतलाया परन्तु बर्ट को कोटा बुलाने में महाराव का उत्तरदायित्व हो सकता है; ऐसा अनुमान भी लगाया गया कि महाराव ने समय रहते बर्टन को सैनिक सहयोग नहीं पहुँचाया.
    ■ प्रमुख युद्ध :-
  12. बिथौडा युद्ध :-
    A. दिवस : 8 सित.1857 ई.
    B. पक्ष : i. आउवा Vs जोधपुर + कम्पनी
    ii. आउवा समर्थक : आसोप के ठाकुर शिवनाथ सिंह, आलनियावास के ठाकुर अजीत सिंह, गुलर के ठाकुर बिशन सिंह आदि अपनी-अपनी सेना लेकर आऊवा आ गए
    iii. दूसरी ओर मारवाड़ के शासक तख्त सिंह ने कैप्टन हीथकोट, किलेदार अनार सिंह और फौजदार राजमल लोढ़ा के नेतृत्व में एक सेना क्रान्तिकारियों के खिलाफ भेजी
    C. स्थान : जिला पाली
    D. परिणाम : जोधपुर एवं कम्पनी सेना बुरी तरह से हारे एवं जोधपुर किलेदार अनार सिंह मारा गया.
    E. महत्त्व : इसी युद्ध से आऊवा ठिकाने का स्वतंत्रता संग्राम आरम्भ माना जाता है.
  13. चेलावास युद्ध :-
    A. दिवस : 18 सित. 1857 ई.
    B. अन्य नाम : गोरा-काला युद्ध
    C. स्थान : जिला पाली
    D. पक्ष : i. आउवा Vs जोधपुर + कम्पनी
    ii. A.G.G. जॉर्ज पैट्रिक लोरेन्स एवं जोधपुर P.A. मोंकमेसन ने भाग आउवा विरोधी मोर्चे का नेतृत्व
    E. परिणाम : आऊवा की निर्णायक विजय
    F. प्रमुख घटना– P.A. मोकमेसन की विद्रोहियों ने ह्त्या कर गर्दन आउआ दुर्ग के फाटक पर लटका कर निम्न गीत गाकर विद्रोहियों ने जश्न मनाया –
    ढोल बाजे चंग बाजै, भलो बाजे बाँकियो।
    एजेंट को मार कर, दरवाज़ा पर टाँकियो।
    झूझे आहूवो ये झूझो आहूवो, मुल्कां में
    जोधपुर पी.ए. मोकमेसन की हत्या के बाद AGG जॉर्ज पेट्रिक लोरेन्स ने बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाकर चूलावास गांव में शरण
  14. नारनौल युद्ध :
    A. दिवस : 16 नव. 1857 ई.
    B. स्थान : हरियाणा
    C. पक्ष : जोधपुर लीजियन टुकड़ी Vs कम्पनी+जोधपुर सेना
    D. परिणाम : विद्रोही जोधपुर लीजियन टुकड़ी परास्त परन्तु विरोधी पक्ष का ब्रिगे. गराड मारा गया
  15. आऊवा दुर्ग युद्ध :-
    A. आऊवा दुर्ग पर अधिकार करने हेतु कम्पनी का संघर्ष : जनवरी 19 से 24, 1858 ई. के मध्य
    B. आऊवा दुर्ग पर कम्पनी का अधिकार –
    i. 24 जनवरी 1858 ई.
    ii. कर्नल होम्स द्वारा
    C. ठाकुर कुशालसिंह आऊवा दुर्ग के संघर्ष का उत्तरदायित्व अपने छोटे भाई पृथ्वीसिंह को सौंपकर क्रान्ति के बलिदान हेतु स्वयं को जीवित रख कर मेवाड़ से सहयोग प्राप्त हेतु आऊवा से निकल गये एवं सर्वप्रथम सलुम्बर (मेवाड़) ठाकुर रावत केसरी सिंह ने ठाकुर कुशालसिंह चम्पावत अपने यहाँ शरण दी. सलुम्बर (मेवाड़) ठाकुर रावत केसरी सिंह पर अत्यधिक ब्रिटिश दबाव देख कर ठाकुर कुशालसिंह चम्पावत ने कोठारिया (मेवाड़) ठाकुर रावत जोधसिंह के यहाँ शरण ली जहाँ वह 1860 तक रहा.
  16. कुआड़ा युद्ध / कोठारी युद्ध (भीलवाड़ा) : 9 अगस्त 1858 ई. को ताँत्या टोपे जनरल रॉबर्ट्स से परास्त
    6.कोठारिया युद्ध (नाथद्वारा) : 14 अगस्त 1858 ई.को ताँत्याटोपे ने जनरल रॉबर्ट्स एवं कर्नल होम्स को परास्त किया
  17. अचनेरा युद्ध : विद्रोहियों के हाथों अलवर फ़ौज परास्त
  18. हुडल युद्ध : विद्रोहियों के हाथों भरतपुर PA मेजर मोरिसन परास्त
  19. हम्मीर गढ़ युद्ध : तांत्या टोपे ने नवाब नसीर खां के साथ मिलकर बनास नदी के किनारे लड़े गए इस युद्ध में टोंक नवाब वाजीरुद्दौला को परास्त करे टोंक पर अधिकार करके नवाब को हम्मीरगढ़ में बंधक बनाया Rajasthan me 1857 ki Kranti

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